Rain Alart – देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर से बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने हाल ही में जारी किए गए अपने ताजा बुलेटिन में देशवासियों को आगाह किया है कि आने वाले दिनों में मौसम में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। ठंड की मार झेल रहे नागरिकों के लिए यह चेतावनी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और चक्रवाती गतिविधियों के कारण लगभग 21 राज्यों में प्रचंड बारिश और आंधी-तूफान का खतरा मंडरा रहा है।
शीतलहर के बाद नया संकट
पिछले कुछ दिनों में जब सूरज की किरणों ने दस्तक दी, तो घने कोहरे और कड़कड़ाती ठंड से परेशान लोगों को थोड़ी राहत महसूस हुई थी। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुकून भरा समय बेहद अल्पकालिक साबित होगा। मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में वातावरण में नाटकीय बदलाव होने जा रहा है। उत्तरी भारत के विस्तृत क्षेत्रों में इस परिवर्तन का सबसे अधिक असर दिखाई देगा, जहां तापमान और आर्द्रता दोनों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
राजधानी क्षेत्र में मौसम का रुख
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के एनसीआर क्षेत्र में अगले दो दिनों के भीतर कोहरे की तीव्रता में कमी आने की संभावना है। हालांकि, इसके ठीक बाद ही आकाश में बादलों की चादर बिछ जाएगी और हल्की से मध्यम श्रेणी की वर्षा होने का अनुमान जताया गया है। उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी यही परिदृश्य देखने को मिल सकता है। मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं के अनुसार, इस बारिश के चलते हवा में नमी का स्तर बढ़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप कंपकंपाती ठंड एक बार फिर अपनी दस्तक दे सकती है।
फरवरी-मार्च में भी ठंड का प्रकोप
जलवायु विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया है कि इस वर्ष फरवरी और मार्च के महीनों में भी सर्दी का असर समय-समय पर महसूस होता रहेगा। सामान्यतः इन महीनों में मौसम गर्म होने लगता है, लेकिन इस बार का पैटर्न अलग दिख रहा है। चालू बारिश के दौर के साथ वायुमंडल में नमी की मात्रा बढ़ने से शीतलहर की तीव्रता में इजाफा हो सकता है। यह स्थिति विशेष रूप से उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होगी जो पहले से ही सर्दी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ का व्यापक प्रभाव
वायुमंडलीय दबाव प्रणाली में हो रहे परिवर्तनों के कारण पश्चिमी विक्षोभ अत्यंत सक्रिय हो गया है। यह मौसमी घटना जब भी प्रभावी होती है, तो पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में भारी वर्षा का कारण बनती है। इस बार इसका प्रभाव क्षेत्र काफी विस्तृत होने के संकेत मिल रहे हैं। हिमालयी राज्यों से लेकर गंगा के मैदानों तक, और पश्चिमी घाट से लेकर मध्य भारत तक, विभिन्न क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियां तेज होने की आशंका है।
कृषि जगत के लिए खास सूचनाएं
इस मौसमी बदलाव के बीच कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जो देश के अन्नदाताओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगी। वर्ष 2026 के लिए रासायनिक खादों की नवीनतम मूल्य सूची प्रकाशित हो चुकी है। यूरिया, डाई अमोनियम फास्फेट, पोटाशियम उर्वरक और एनपीके मिश्रित खाद की कीमतों में संशोधन किया गया है। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे केवल अधिकृत मूल्य सूची के अनुसार ही खाद की खरीदारी करें और किसी भी प्रकार के कालाबाजारी से सावधान रहें।
ग्रीष्मकालीन मक्का उत्पादन की रणनीति
गर्मी के मौसम में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए एक विशेष सलाह जारी की गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने पांच उत्कृष्ट संकर किस्मों की पहचान की है, जो गर्मी के मौसम में शानदार पैदावार देने में सक्षम हैं। उचित कृषि प्रबंधन तकनीकों और उन्नत बीजों के समुचित उपयोग से किसान प्रति एकड़ लगभग 60 क्विंटल तक का शानदार उत्पादन हासिल कर सकते हैं। यह उत्पादकता किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ओलावृष्टि का संभावित खतरा
मौसम विभाग ने किसानों को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते उत्तरी भारत के कम से कम पांच राज्यों में ओलावृष्टि हो सकती है। ओले गिरना फसलों के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकता है, विशेष रूप से उन फसलों के लिए जो पकने के चरण में हैं। किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी कटी हुई फसल को खुले में न छोड़ें और तैयार फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करें। आवरण या छप्पर का उपयोग करके फसल को ओलों से बचाया जा सकता है।
चक्रवात ‘मोंथा’ का दुष्प्रभाव
समुद्री क्षेत्रों में विकसित हो रहे चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ ने मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह तूफान तटीय इलाकों के साथ-साथ आंतरिक क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। जिन राज्यों में इस चक्रवात का प्रभाव पड़ने की संभावना है, वहां के निवासियों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश से जान-माल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पूरी तरह से सतर्क हैं और आवश्यकता पड़ने पर राहत कार्यों के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा दिशा-निर्देश और सावधानियां
मौसम विभाग द्वारा जारी यह पूर्वानुमान उन्नत सैटेलाइट प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है। फिर भी, स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक परिवर्तन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी नागरिकों और विशेष रूप से किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। आपातकालीन संपर्क नंबरों को सुरक्षित रखें और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार रहें।
प्रकृति की इन अप्रत्याशित गतिविधियों के बीच सतर्कता ही सबसे बड़ा कवच है। मौसम में होने वाले इन व्यापक परिवर्तनों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता की आवश्यकता है। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए समय रहते उचित कदम उठाने चाहिए, जबकि आम नागरिकों को अपने दैनिक कार्यों की योजना मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए। मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर अपडेट जारी करता रहेगा। आइए हम सभी मिलकर इस चुनौतीपूर्ण समय का सामना करें और एक-दूसरे की मदद करें।




