चेक बाउंस करने वालों के लिए RBI का बड़ा फैसला, जानिए नया नियम और सजा | Cheque Bounce Rules

By shreya

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Cheque Bounce Rules –  वर्तमान समय में चेक भारतीय वित्तीय प्रणाली का अभिन्न अंग बन गया है। व्यावसायिक लेनदेन, वेतन भुगतान, किराए का निपटारा, शैक्षणिक शुल्क और अनेक प्रकार के आर्थिक कार्यों में चेक का प्रयोग व्यापक रूप से होता है। यह भुगतान का एक सुरक्षित और मान्य माध्यम माना जाता है जो दशकों से प्रचलन में है। हालांकि जब कभी चेक का भुगतान नहीं हो पाता और वह वापस लौट आता है, तो यह स्थिति न केवल वित्तीय संकट उत्पन्न करती है बल्कि कानूनी जटिलताओं का कारण भी बन सकती है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक और न्यायिक प्रणाली ने चेक अनादरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट एवं कठोर बनाने का निर्णय लिया है। ये नए नियम ग्राहकों की सुरक्षा के साथ-साथ बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये परिवर्तन क्या हैं और आम नागरिकों पर इनका क्या प्रभाव पड़ेगा।

चेक अनादरण का अर्थ और बढ़ती समस्या

चेक अनादरण की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बैंक किसी चेक को स्वीकार करने और उसका भुगतान करने से इनकार कर देता है। इसके पीछे अनेक कारण हो सकते हैं जैसे कि खाते में अपर्याप्त धनराशि होना, खाते का बंद या निष्क्रिय होना, हस्ताक्षर में विसंगति, चेक पर अंकित तिथि या राशि में त्रुटि, या अन्य तकनीकी कारण। वर्तमान में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ ऐसे मामलों में भी वृद्धि हुई है।

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यह समस्या केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भी है क्योंकि इससे व्यावसायिक संबंधों में विश्वास की कमी होती है। जब कोई व्यक्ति चेक देता है तो वह एक वादा करता है कि उस राशि का भुगतान होगा। यदि यह वादा टूटता है तो इससे पारस्परिक भरोसा क्षतिग्रस्त होता है और विवाद की स्थिति निर्मित होती है। इसलिए इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है।

पूर्व में उपभोक्ताओं को होने वाली कठिनाइयां

पुरानी व्यवस्था में जब किसी का चेक अनादरित होता था तो खाताधारक को इसकी सूचना समय पर नहीं मिल पाती थी। कई दिन या सप्ताह बाद जब पीड़ित पक्ष को इसका पता चलता था तब तक काफी समय बीत चुका होता था। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति यह भी नहीं समझ पाता था कि उसे न्यायिक कार्रवाई के लिए किस न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इस अस्पष्टता और भ्रम के कारण लोग गलत स्थान पर मामला दर्ज कर देते थे या फिर कानूनी प्रक्रिया से ही परहेज करते थे।

इस स्थिति का दुरुपयोग करते हुए कुछ बेईमान लोग जानबूझकर चेक जारी करते थे और फिर उसे बाउंस करा देते थे। वे जानते थे कि कानूनी प्रक्रिया जटिल है और पीड़ित पक्ष शायद कार्रवाई नहीं करेगा। इससे ईमानदार लोगों को नुकसान होता था और धोखाधड़ी करने वालों को बढ़ावा मिलता था। यह व्यवस्था में एक बड़ी खामी थी जिसे दूर करना अत्यंत आवश्यक था।

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रिज़र्व बैंक के नवीनतम दिशानिर्देश

भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। नवीन प्रावधानों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति द्वारा जारी चेक का अनादरण होता है, तो बैंक को 24 घंटे की समयसीमा के भीतर इसकी जानकारी एसएमएस या ईमेल के माध्यम से संबंधित व्यक्ति को देना अनिवार्य होगा। यह एक क्रांतिकारी कदम है जो पारदर्शिता बढ़ाएगा।

त्वरित सूचना मिलने से दोनों पक्ष तुरंत आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा। चेक जारी करने वाला व्यक्ति शीघ्र भुगतान की व्यवस्था कर सकेगा और प्राप्तकर्ता समय रहते कानूनी उपाय अपना सकेगा। यह नियम ग्राहक हित में है और बैंकिंग प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाता है। इससे अनावश्यक विवादों में कमी आएगी और लोगों का बैंकिंग सेवाओं पर विश्वास सुदृढ़ होगा।

बारंबार अनादरण पर खाता निलंबन का प्रावधान

नवीन नियमों में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति के चेक लगातार तीन बार अनादरित होते हैं, तो बैंक को उसके खाते को अस्थायी रूप से निलंबित करने का अधिकार होगा। खाता निलंबन का आशय है कि वह व्यक्ति एक निश्चित अवधि तक अपने खाते से किसी भी प्रकार का लेनदेन नहीं कर पाएगा। यह प्रावधान लोगों को जिम्मेदारी और सावधानी से चेक जारी करने के लिए प्रेरित करेगा।

यह कदम उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो लापरवाही से या जानबूझकर खाली चेक जारी करते हैं। जब उन्हें पता होगा कि तीन बार चेक बाउंस होने पर उनका खाता निलंबित हो सकता है, तो वे पहले से सतर्क रहेंगे। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन स्थापित करने में सहायक होगी और बैंकिंग प्रणाली की मजबूती में योगदान देगी।

चेक अनादरण से बचाव के उपाय

चेक अनादरण से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनानी चाहिए। चेक जारी करने से पूर्व हमेशा अपने खाते में उपलब्ध शेष राशि की जांच अवश्य करें। चेक पर अंकित नाम, दिनांक, राशि और हस्ताक्षर स्पष्ट और सही होने चाहिए ताकि कोई भ्रम न रहे। चेक पर किसी भी प्रकार की काट-छांट या ऊपर से लिखने से बचें क्योंकि इससे बैंक चेक को अस्वीकार कर सकता है।

यदि आप भविष्य की तिथि वाला चेक दे रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि उस निर्धारित तिथि तक आपके खाते में पर्याप्त धनराशि होगी। चेकबुक को सुरक्षित स्थान पर रखें और किसी भी स्थिति में चेक खो जाने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। ये छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी समस्याओं से बचने में मददगार साबित होती हैं।

कानूनी परिणाम और दंड का प्रावधान

चेक का अनादरण केवल एक बैंकिंग त्रुटि नहीं है बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के अंतर्गत चेक अनादरण को गंभीर अपराध माना गया है। इस धारा के तहत दोषी व्यक्ति को दो वर्ष तक की कारावास की सजा हो सकती है। इसके साथ ही चेक पर अंकित राशि के दोगुने तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त न्यायालय का खर्च, वकील की फीस और अन्य कानूनी शुल्क भी वहन करने पड़ सकते हैं जो काफी भारी हो सकते हैं। यह कठोर कानून इसलिए बनाया गया है ताकि लोग बिना सोचे-समझे या धोखाधड़ी के इरादे से चेक जारी न करें। यह कानून वित्तीय अनुशासन स्थापित करने और ईमानदार लेनदेन को बढ़ावा देने में सहायक है।

सामाजिक और नैतिक पहलू

चेक अनादरण का मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक और सामाजिक भी है। जब कोई व्यक्ति चेक देता है तो वह एक वचन देता है कि उस राशि का भुगतान होगा। यह विश्वास और ईमानदारी का प्रतीक है। यदि यह वचन पूरा नहीं होता तो इससे सामाजिक विश्वास टूटता है और व्यावसायिक संबंध प्रभावित होते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को जिम्मेदारी से चेक का उपयोग करना चाहिए।

समाज में विश्वास की संस्कृति को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि लोग अपने वित्तीय दायित्वों को गंभीरता से लें। चेक जारी करना एक कानूनी दस्तावेज देने जैसा है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से लोगों को इसके महत्व के बारे में बताना जरूरी है।

चेक अनादरण की समस्या धन से कहीं अधिक विश्वास और उत्तरदायित्व से जुड़ी हुई है। भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीन नियम और न्यायालयों के निर्णय इस चुनौती पर नियंत्रण पाने के लिए अत्यंत आवश्यक कदम हैं। यदि प्रत्येक नागरिक जिम्मेदारी से चेक का प्रयोग करे और बैंकिंग नियमों का पालन करे, तो इन मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। जागरूकता, सावधानी और नैतिकता ही इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है। बैंक, सरकार और नागरिकों को मिलकर एक स्वच्छ और विश्वसनीय वित्तीय व्यवस्था के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

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